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अविस्मरणीय होगा भूटान का ब्लॉगर सम्मेलन
जैसा कि आप सभी को विदित है, कि लखनऊ से प्रकाशित "परिकल्पना समय" (हिन्दी मासिक पत्रिका) और "परिकल्पना" (सामाजिक संस्था) के संयुक्त तत्वावधान में प्रकृति की अनुपम छटा से ओतप्रोत दक्षिण एशिया का एक महत्वपूर्ण देश भूटान की राजधानी और सांस् ... [read more]
प्रतिभा का सम्मान
इतिहास के पन्नों में राजशाही और जमींदारों की बर्बरता और क्रूरता के किस्से भरे परे हैं। लेकिन कई ऐसे अपवाद इतिहास से निकलकर सामने आते हैं तो मन कौतूहलता से भर जाता है। मधेपुरा में मिले इतिहास के एक सुनहरे साक्ष्य को बांटने से नहीं रोक पा ... [read more]
परिकल्पना सार्क शिखर सम्मान हेतु प्रविष्टियाँ आमंत्रित
जैसा कि आप सभी को विदित है, कि विगत चार वर्षों से परिकल्पना (संस्था) और परिकल्पना समय (मासिक पत्रिका) के संयुक्त तत्वावधान में प्रत्येक वर्ष 51 ब्लॉगर्स को परिकल्पना सम्मान प्रदान किया जाता रहा है, इस वर्ष से इस सम्मान प्रक्रिया में आंश ... [read more]
चतुर्थ अंतरराष्ट्रीय परिकल्पना ब्लॉगोत्सव भूटान में 15 से 18 जनवरी 2015 तक
लखनऊ से प्रकाशित "परिकल्पना समय" (हिन्दी मासिक पत्रिका) और "परिकल्पना" (सामाजिक संस्था) के संयुक्त तत्वावधान में प्रकृति की अनुपम छटा से ओतप्रोत दक्षिण एशिया का एक महत्वपूर्ण देश भूटान  की राजधानी और सांस्कृतिक राजधानी क्रमश: थिम्पू और ... [read more]
चौथा अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन भूटान में.....
विगत वर्ष हिमालय पर बसे दक्षिण एशिया के एक बेहद खूबसूरत देश नेपाल की राजधानी काठमांडू में आयोजित 'परिकल्पना ब्लॉग उत्सव' में हम सभी शामिल हुये। इस महोत्सव में भारत सहित दक्षिण एशिया के लगभग 50 ब्लॉगर्स की उपस्थिती रही। नेपाल की साहित ... [read more]
“दिमाग की रीसाइक्लिंग”
सदी के सबसे ज्यादा ज्ञानी समझे जाने वाले आइनस्टीन नें अपने दिमाग का महज पांच परसेंट ही इस्तेमाल किया था। वहीं आज के नवयुवक इसका आधा भी खर्च करने से कतराते हैं, कब कौन सी सरकार दिमाग खर्च करने पर भी टैक्स लगा दे और वो पड़ जाए झमेले में! ग ... [read more]
सभ्य समाज के विकास में फलित ज्‍योतिष कितना सच कितना झूठ...
पड़ताल एक पुस्तक के माध्यम से :  [read more]
मीडिया का मोदी गान
सलीम अख्तर सिद्दीकी  [read more]
फ़िरदौस ख़ान सर्वश्रेष्ठ ब्लॊगर पुरस्कार से सम्मानित
फ़िरदौस ख़ान सर्वश्रेष्ठ ब्लॊगर पुरस्कार से सम्मानित नई दिल्ली. पत्रकार फ़िरदौस ख़ान को साहित्यिक विषयों पर लेखन के लिए सर्वश्रेष्ठ ब्लॊगर पुरस्कार से सम्मानित गया है. यह पुरस्कार उन्हें हिन्दी दिवस के मौक़े पर ख़बरिया चैनल एबीपी न्यूज़ द् ... [read more]
वो खुद सामने आये…
मैं कहाँ किसी को ढूँढने निकला, जिसे तलाश मेरी...वो खुद सामने आये|- मानस 'मस्ताना' [read more]
सुखमय प्रस्थान
आज कवि मित्र राजकिशोर राजन के जन्मदिन पर उनकी एक कविता.. जो मुझे बेहद पसंद है.. [read more]
मित्रों प्रणाम, आप सबके स् ...
मित्रों प्रणाम, आप सबके स्नेह से मुझे तुलसी जयंती पर भोपाल के हिंदी साहित्य सम्मेलन भवन में दिनांक 3 अगस्त 2014 को मध्य प्रदेश तुलसी साहित्य अकादमी द्वारा वर्ष 2014 का "तुलसी सम्मान" प्रदान किया गया। संबंधित चित्र संलग्न है। डॉ सु ... [read more]
स्वातंत्र्योत्तर हिंदी कविता के यशस्वी हस्ताक्षर कवि महेंद्रभटनागर
आलेख: डॉ. वीरेन्द्र सिंह यादव हिंदी साहित्येतिहास में कवि महेंद्रभटनागर की पहचान प्रगतिशील काव्य-धारा और गीति-रचना के अन्तर्गत स्पष्ट बन चुकी है। वे एक स्थापित कवि हैं — स्वातंत्र्योत्तर हिंदी कविता के यशस्वी हस्ताक्षर। उन्हें प्रगतिवा ... [read more]
गाजा पर ‘मजलूमों’ पर का कहर
सलीम अख्तर सिद्दीकी एडोल्फ हिटलर 1933 में र्जमनी की सत्ता में आया था। उसने यहूदियों को इंसानी नस्ल का हिस्सा नहीं माना। 1939 में र्जमनी द्वारा दूसरा विश्व युद्ध भड़काने के बाद हिटलर ने यहूदियों को जड़ से मिटाने के लिए अंतिम हल यानी ह्यफा ... [read more]
पहली बार : भावना मिश्रा की कविताओं पर के रवींद्र के पोस्टर
पहली बार : भावना मिश्रा की कविताओं पर के रवींद्र के पोस्टर [read more]
मानवता के स्वप्न अब तक अधूरे है
मानवता के स्वप्न अब तक अधूरे है [read more]
गौर करो,सुनो-समझो,फिर कहो
जो मिलते ही बड़ी बड़ी बातें करते हैं कुछ कर गुजरने की  वे रेत की दीवारों की तरह गिर जाते हैं  उनके होने के निशाँ भी नहीं मिलते   …  …तो गौर करो,सुनो-समझो,फिर कहो  [read more]
डायन से ड्राक्युला हुई महंगाई
सलीम अख्तर सिद्दीकी बहुत दिनों बाद बाजार गया था। बाजार में महंगाई इठलाती इतराती घूम रही थी। वह पहले से ज्यादा मोटी हो गई थी। चेहरे पर पहले से ज्यादा चमक थी। गरूर तो जैसे उसमें कूट-कूट कर भरा पड़ा था। उसने मुझ पर तंज भरी नजरें डालीं। ... [read more]
गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में)-गुरु से सीखा गुरु से जाना
गुरु से सीखा गुरु से जाना गुरु ने समझाया गुरु ने बताया ज्ञान रखने से नहीं बांटने से बढ़ता है सार्थक ज्ञान ही जीवन आधार है ज्ञान का दुरूपयोग अक्षम्य अपराध है जो बांटा नहीं वह अज्ञान है उपयोग नहीं किया तो अत्याचार है ज्ञान का ... [read more]
परिकल्पना बनने जा रहा है विश्व ब्लॉगिंग का एक बड़ा प्लेटफॉर्म ?
चौंकिए मत, यह सच है कि आपकी  'परिकल्पना'  एक भारतीय गैर लाभ धर्मार्थ संगठन का स्वरूप धारण करने जा रही है, जो अपने साथ विश्व के कई भाषाओं के ब्लॉगर और विद्वानों की एक सशक्त टीम बनाकर मुफ्त लाइसेंस या सार्वजनिक कार्यक्रम (public domain) क ... [read more]
कार्यशाला-३५ शहर में बरसात
शहर में बरसात आ गई है, और इस बरसात से खुश-हैरान-परेशान जन अपनी अपनी जीवन गाथा को अलग अलग तरह से व्यक्त करने लग गए हैं। अपने शहर की बरसात को रेखांकित करने का यह विशेष अवसर है जब सभी रचनाकार इस कार्यशाला में अपने उस विशेष शहर की बरसात को ... [read more]
बस आपके लिए
परिकल्पना उत्सव समाप्त हुआ है - परिकल्पना का प्रवाह नहीं  परिकल्पना एक निर्बाध  कुछ अल्हड़  कुछ सशक्त  कुछ बिंदास  कुछ गहन-गंभीर  धूप-छाँव सी नदी है  और मैं मछुआरिन :)  भावनाओं की मछलियाँ मुझसे बच नहीं सकतीं  तो एक बड़ी टोकरी परि ... [read more]
परिकल्पना ब्लॉग उत्सव इसबार मॉरीशस.....
परिकल्पना केवल एक सामुदायिक ब्लॉग नहीं, बल्कि हिन्दी के माध्यम से एक सुंदर और खुशहाल सह- अस्तित्व की परिकल्पना को मूर्तरूप देने की कोशिश है। [read more]
chhand salila: durmila chhand -sanjiv
ॐ छंद सलिला: दुर्मिला छंद    संजीव * छंद-लक्षण: जाति लाक्षणिक, प्रति चरण मात्रा ३२ मात्रा, यति १०-८-१४, पदांत  गुरु गुरु, चौकल में लघु गुरु लघु (पयोधर या जगण) वर्जित। [read more]
२५. याद मुझे फिर कनहल आया
तपती देख धरा की काया। याद मुझे फिर कनहल आया। [read more]
२४. फूल कनेर के
किसने रोके पाँव अचानक धीरे-धीरे टेर के। उजले-पीले भर आए आँगन में फूल कनेर के। [read more]
ब्लॉगोत्सव-२०१४, परिकल्पना समय की अब तक कुछ ख़ास झलकियाँ (समापन)
समय  .... यह समय जो हमेशा हमारे साथ होता है इसी ने बनाया था परिकल्पना का मंच  साक्षी बन बहुत कुछ कहता गया   हिंदी - हिंदी ब्लॉग्स की पहचान को उभारता गया  इसकी नींव के पत्थर रवीन्द्र प्रभात ने जोड़े थे      आज उस समय की अब तक की कुछ ... [read more]
ब्लॉगोत्सव-२०१४, कहने को ,सुनाने को और था, लेकिन .... ३ (समापन)
पूरी हुई परिक्रमा  … अब बारी है कुछ अपनी कह सुनाने की  नहीं कहना मैंने नहीं सीखा  हाँ, कहने से पहले सोचती हूँ  कुछ वक़्त को वक़्त देती हूँ  कुछ अपने आप को ! किसी का दिल दुखे - मैं चाहती नहीं  पर न दुखाओ तो कुछ भी कह जाते हैं  तो कल ... [read more]
ब्लॉगोत्सव-२०१४, कहने को ,सुनाने को और था, लेकिन .... २ (समापन)
कितनी बातें जो तेरे शहर की थीं  हाँ मेरे गाँव से थोड़ा अलग  …  उनको जोड़कर  तोड़कर  कहना तो था अभी और   लेकिन फिर कभी ! अभी तो यही कहना है इस मंच से - एक सपने सा ही लगता है निकल पाऊँगी  इस जंगल में शब्दों के घने साये हैँ   [read more]
ब्लॉगोत्सव-२०१४, कहने को ,सुनाने को और था, लेकिन .... १ (समापन)
दो बुलबुले आँखों के मुहाने से बादलों की तरह ख़्वाबों की दुनिया बनाते हैं .... ये ख़्वाबों की दुनिया कितनी अच्छी लगती है ! न कहीं जाना ना कोई खर्च सबकुछ पास उतर आता है बादल , पहाड़, चाँद , सितारे आकाश, पाताल , धरती , नदी बस ख्व ... [read more]