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रुझान : 96 घंटे बाद .....दशक के हिंदी चिट्ठाकार ?
  रुझान : 96 घंटे  बाद  ____________ [read more]
My 61st Birthday
GAZALNUMA GEET-QUAFAN-कफ़न । [read more]
एक बाग़ के दो पेड़
एक बाग़ में दो पेड़ लगे दोनों साथ साथ बढे माली ने दोनों को अपना प्रीत जल दिया साथ साथ सिंचित किया समय के साथ,दोनों में फल आये एक वृक्ष के कच्चे फल भी लोगों ने खाये कच्ची केरियां भी चटखारे ले लेकर खायी  किसीने अचार तो किसी ने चटनी ... [read more]
क्या हिन्दी ब्लॉगजगत सचमुच बच्चा है जी ?
जहां तक मेरी जानकारी मे है कि हिंदी ब्लोगिंग की शुरुआत 02 मार्च 2003 को हुई थी और हिंदी का पहला अधिकृत ब्लॉग होने का सौभाग्य प्राप्त है नौ दो ग्यारह को । इसप्रकार फरवरी 2013 मे दशक पूरा हो रहा है । यानि अगले वर्ष हम नए दशक मे प्रवेश कर ... [read more]
खून जब बन जाता है पानी
खून जब बन जाता है पानी मर्यादाएं हो जाती हैं ध्वस्त संतान निकम्मी हो जाती प्रताड़ित करती माँ बाप को रोती है धरती रोता है आकाश रोते हैं माँ बाप कोसते हैं किस्मत को क्यों जन्म दिया ऐसी संतान को निसंतान होने का दुःख इतना भीष ... [read more]
कौन बनेगा इस दशक का हिन्दी चिट्ठाकार ?
जैसा कि आप सभी को विदित है कि इस वर्ष के समापन के साथ ही हिन्दी ब्लॉग जगत नए दशक मे प्रवेश कर जाएगा, इसलिए परिकल्पना समूह के द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि परिकल्पना सम्मान के साथ दशक के श्रेष्ठ पाँच ब्लॉग और दशक के श्रेष्ठ पाँच ब्लॉगर ... [read more]
दर्द
दर्द अब पत्थर हो गया है आँखें वीरान पथरीली जमीन [read more]
मदर्स दे पर विभा नायक की एक खूबसूरत कविता.
मैंने महसूस किया है हर मोड़ पर कि मेरी मुसकुराहट, मेरी हंसी और उसमें खिलते अनगिनत गुलाबों की पौध तुम्हारी रोपी हुई ही तो है मेरी धमनियों में दौड़ता रक्त मेरी आँखों की चमक सब तुम्हारी नफासत से सजाई इबारतें ही तो है और मेरी हर तक़ली ... [read more]
फितरत
  चुगलखोर चुगली से, चोर हेराफेरी से,                 बाज नहीं आता है कितना ही भूखा हो, मगर शेर हरगिज भी,                 घास नहीं खाता है रंग कर यदि राजा  भी, बन जाए जो सियार,                   'हुआ'हुआ' करता है नरक का आदी जो, ... [read more]
खुदा झुकता जहां खुद, वो खुदा से बडी होगी,
बहुत दुख होता है ऐसे सदर्भों को पढ‌कर जिसमें हम अपनी माँ को परमात्मा या मानव किसी एक श्रेणी में स्थापित करने का प्रयास करते हैं । यही तो है हमारा अहंकार,  कि इतना श्रेष्ठ समझ लिया है हमने अपने आपको कि हम आकलित करते है अपनी माँ का प्रेम, ... [read more]
कौन कहता है ,ऊंचे पहाड़ों पर घास के मैदान नहीं होते
कौन कहता है [read more]
आपका वोट हमारे लिए महत्वपूर्ण है ।
इस वर्ष के समापन के साथ ही हिन्दी ब्लॉग जगत नए दशक मे प्रवेश कर जाएगा, इसलिए परिकल्पना समूह के द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि परिकल्पना सम्मान के साथ दशक के श्रेष्ठ पाँच ब्लॉग और दशक के श्रेष्ठ पाँच ब्लॉगर का भी सारस्वत सम्मान किया जाय ... [read more]
मै -स्वामी डा.मोम बाबा बी.टेक.
मेरे पिताजी चाहते थे मै इंजीनियर बनू,मैंने बी.टेक.पास किया मेरी माताजी चाहती थी मै डॉक्टर बनू,सो मैंने करेस्पोंडेंस कोर्स से होमियोपेथी पढ़ कर अपने नाम के आगे डॉक्टर लगाया. मेरे दादाजी चाहते थे कि मै कर्मकांडी पंडित बनू,तो उन्होंने मु ... [read more]
कार्यशाला-२१ समीक्षात्मक टिप्पणी
नवगीत की पाठशाला का निरंतर चलते रहना इस बात का प्रमाण है कि नवगीत को पसंद किया जा रहा है और नये लोग नवगीत सीखना चाहते हैं। नवगीत में नई कविता का कथ्य लयात्मकता की रेशमी डोर में आवद्ध कर जब प्रस्तुत किया जाता है तो वह अपना ऐसा प्रभाव छोड ... [read more]
माटी की महक-ऊँचाइयों की कसक
पहली पहली बारिश पर , माटी की सोंधी सोंधी महक फुदकते पंछियों का कलरव,चहक भंवरों का गुंजन तितलियों का नर्तन आम्र तरु पर विकसे बौरों की खुशबू कोकिला की कुहू.कुहू खिलती कलियाँ,महकते पुष्प हरी घांस पर बिखरे शबनम के मोती, या दालान मे ... [read more]
कुंजी बोर्ड की निरर्थक व्यंग-आत्मकथा ।
कुंजी बोर्ड की निरर्थक व्यंग-आत्मकथा । [read more]
मातृदिवस
-------------  मातृदिवस को मत रहने दो,तुम केवल एक मात्र दिवस  रोज करो सेवा माता की    ,रोज  मनाओ   मातृदिवस माँ झरना आशिवादों का ,  माँ ममता का  सागर है माँ सुरसरी स्नेह  की है, कोई न माँ से बढ़  कर है माता का ही तो प्रसाद  है,ये त ... [read more]
आज किसी ने मुझे मेरे बचपन के नाम से पुकारा ,
आज किसी ने मुझे मेरे [read more]
यादें
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वाह क्या प्रेम है..!! wow..!! what a LOVE?
वाह क्या प्रेम है..!! wow..!! what a LOVE? [read more]
मदद के हाथ
सलीम अख्तर सिद्दीकी रात के लगभग 11 बजे थे। हाईवे पर ट्रैफिक पूरी रफ्तार से दौड़ रहा था। एक कार से थोड़ा आगे बाइक पर एक युवा अपनी मस्ती में स्पीड से जा रहा था। अचानक उसके सामने एक कुत्ता आ गया। उसने तेजी से ब्रेक लगाए। कुत्ता तो तेजी से स ... [read more]
अभी तो मै जवान हूँ
व्यंग्य  [read more]
एक और अवतार तो बनता है
व्यंग्य  [read more]
हिन्दी का ज्यादातर लेखक खतरे नहीं उठाना जनता : शिवमूर्ति
उत्तर भारत के ग्रामीण जीवन की अनेकशः समस्याओं, स्त्री तथा दलित चेतना के नये सन्दर्भों के व्याख्याकार शिवमूर्ति ने केसरकस्तूरी’ कहानी संग्रह, साम्प्रदायिकता को लेकर त्रिशूल’ तथा दलित विमर्श के नये सन्दर्भों को उद्घाटित करता उनका उपन्यास ... [read more]
मेरी आँखों ने जो देखा
पैसा,सत्ता, ताकत ही सब कुछ है इमानदारी बकवास लूट खसोट करना भ्रष्ट होना सबसे उत्तम  है  ना यह सत्य है ना ही भावनाओं का उबाल ना मस्तिष्क की उपज ना ही ह्रदय की आवाज़ ये केवल मेरी आँखों ने जो देखा मेरे कानों ने जो सुना मेरे शहर ... [read more]
रहस्य-रोमांच: कहानी अतृप्त आत्माओं की-1
रहस्य-रोमांच: कहानी अतृप्त आत्माओं की-1: [read more]
ग़ज़लगंगा.dg: जाने किस-किस की आस होता है
जाने किस-किस की आस होता है. जिसका चेहरा उदास होता है. [read more]
जीवन एक विशालकाय कैनवास
जीवन [read more]
प्रेम का समुद्र
पानी की बूँद था, अपने प्रेम से तुमने उसे समुद्र बनाया अब तुम ही विछोह चाहती हो भाप जैसे उड़ा कर आकाश में मिलाना चाहती हो मेरे अस्तित्व को ही मिटाना चाहती हो सृजक भी तुम विध्वंसक भी तुम यह कैसे हो सकता है ? कितना भी प्रयत्न ... [read more]
तिलहन,दलहन और दुल्हन
लोग क्लोरोस्ट्राल  से घबराते है इसलिए तेल कम खाते   है फिर भी तेल के दाम बढे जाते है     उपज कम है,इसलिए ,मंहगी है तिलहन भी [read more]